भौतिक राशियाँ किसे कहते है भौतिक राशियाँ के प्रकार, कार्य, विस्थापन, प्रक्षेप्य गति

भौतिक राशियाँ किसे कहते है भौतिक राशियाँ के प्रकार, कार्य, विस्थापन, प्रक्षेप्य गति

भौतिक राशियाँ

भौतिक विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों तथा द्रव्य व इनसे सम्बन्धित अन्योन्य क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। सभी भौतिक राशियों को दो भागों में समूहित कर उनका अध्ययन किया जाता है, जो इस प्रकार हैं

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अदिश राशियाँ – भौतिक राशियाँ, जिनमें केवल परिमाण होता है दिशा नहीं, उन्हें अदिश राशियाँ कहा जाता है। द्रव्यमान, चाल, आयतन, कार्य, समय, ऊर्जा, विद्युत धारा, ताप तथा दाब आदि अदिश राशियाँ हैं।

सदिश राशियाँ – भौतिक राशियाँ, जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है, सदिश राशियाँ कहलाती हैं। विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग तथा बल आघूर्ण आदि सदिश राशियाँ हैं।

महत्त्वपूर्ण भौतिक राशियाँ

दूरी– किसी वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग की लम्बाई दूरी कहलाती है।

• विस्थापन – एक निश्चित दिशा में दो बिन्दुओं के बीच की लम्बवत् दूरी को विस्थापन कहते हैं। यह धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य भी हो सकता है।

• चाल -किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी, चाल कहलाती है।

वेग – किसी वस्तु के विस्थापन की समय दर को वेग कहते हैं।

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• त्वरण – समय के साथ किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। ऋणात्मक त्वरण को मन्दन कहते हैं।

• संवेग -किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को उस वस्तु का संवेग कहते हैं।

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प्रक्षेप्य गति- जब कोई पिण्ड पृथ्वी की सतह से कुछ ऊँचाई से सतह के समानान्तर अर्थात् क्षैतिज दिशा में फेंका जाता है, तो उसकी गति प्रक्षेप्य गति कहलाती है।
प्रक्षेप्य गति में कण के महत्तम उदग्र विस्थापन के लिए कण को क्षैतिज से 45° के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है।

बल– बल वह भौतिक बाह्य कारक है, जो किसी वस्तु की प्रारम्भिक अवस्था में परिवर्तन लाता है या लाने की चेष्टा करता है। यह सदिश राशि है, जिसका SI मात्रक न्यूटन है।

घर्षण– घर्षण बल वह विरोधी बल है, जो दो वस्तुओं के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है।

घर्षण को कम करने की कुछ प्रमुख विधियाँ-

  • स्नेहक का प्रयोग करके, उदाहरण-तेल अथवा ग्रीस
  • बॉल-बियरिंग का प्रयोग करके
  • साबुन के घोल का प्रयोग करके • पाउडर का प्रयोग करके

वृत्तीय गति- जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर गति करती है, तो उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है।

  • जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर चलती है, तो उस पर एक बल वृत्त के केन्द्र की ओर कार्य करता है। इसे अभिकेन्द्र बल कहते हैं।
  • अपकेन्द्रीय बल एक छद्म बल है जिसकी दिशा अभिकेन्द्री बल के विपरीत दिशा में होती है। यह अ-जड़त्वीय निर्देश तन्त्र पर लागू होता है।
  • कपड़े सुखाने की मशीन, दूध से मक्खन निकालने की मशीन इत्यादि अपकेन्द्रीय बल के सिद्धान्त पर कार्य करती है।
  • आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करने के लिए घुमावदार रेलवे ट्रेक व घुमावदार सड़कें एक किनारे पर झुकी हुई या उठी हुई होती हैं।
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कार्य- कार्य, बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है, इसका मात्रक जूल है। कार्य (W) = बल (F) x बल की दिशा में विस्थापन (d) यदि बल व विस्थापन, परस्पर लम्बवत् होते हैं, तो किया गया कार्य शून्य होता है।

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